Bihar: केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस की पार्टी ने राज्य महासचिव को किया बर्खास्त, PM के खिलाफ दायर की थी याचिका

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राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने अपने राज्य महासचिव सुधीर कुमार ओझा (Sudhir Kumar Ojha) के खिलाफ कार्रवाई की है। राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (rashtriya lok janshakti party) ने उन्हें निष्कासित कर दिया है। बिहार की एक अदालत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) के खिलाफ याचिका दायर करने के कुछ दिनों बाद उनके खिलाफ ये कार्रवाई की गई है।  

पार्टी ने जारी किया बयान
पार्टी ने राज्य महासचिव सुधीर कुमार ओझा के खिलाफ इस कार्रवाई को लेकर एक बयान भी जारी किया है। बयान में कहा गया है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के चलते प्रदेश अध्यक्ष और सांसद प्रिंस राज ने ओझा ने निष्कासन का आदेश दिया। हालांकि पार्टी के बयान में पीएम के खिलाफ दायर याचिका का जिक्र नहीं किया गया है। वहीं, पार्टी सूत्रों का कहना है कि कुछ दिनों पहले मुजफ्फरपुर में ओझा द्वारा दायर याचिका को लेकर आरएलजेपी प्रमुख पशुपति कुमार पारस को बड़ी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई है। 

पीएम के खिलाफ दायर की याचिका
गौरतलब है कि बीते शुक्रवार को सुधीर कुमार ओझा ने एक जनहित याचिका दायर की थी। मुजफ्फरपुर निवासी विनायक कुमार की ओर से दायर इस याचिका में ओझा ने विभिन्न क्षेत्रों में निजीकरण कर कथित तौर पर संविधान का उल्लंघन करने के मामले में पीएम मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित अन्य के खिलाफ संविधान का उल्लंघन करने के लिए मामला दर्ज करने की प्रार्थना की थी। उन्होंने याचिका में कहा कि निजीकरण संविधान द्वारा गारंटीकृत समानता के अधिकार के खिलाफ है। इस याचिका पर सुनवाई के लिए मुजफ्फरपुर की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (पूर्व) की अदालत ने 6 अगस्त की तारीख दी है। 

गौरतलब है कि सुधीर कुमार ओझा पेशे से वकील भी हैं। उन्हें एक सीरियल वादी के रूप में जाना जाता है। वे अकसर राजनेताओं, फिल्म सितारों और यहां तक कि विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के खिलाफ दायर याचिकाओं के लिए चर्चा में रहते हैं।

विस्तार

राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने अपने राज्य महासचिव सुधीर कुमार ओझा (Sudhir Kumar Ojha) के खिलाफ कार्रवाई की है। राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (rashtriya lok janshakti party) ने उन्हें निष्कासित कर दिया है। बिहार की एक अदालत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) के खिलाफ याचिका दायर करने के कुछ दिनों बाद उनके खिलाफ ये कार्रवाई की गई है।  

पार्टी ने जारी किया बयान

पार्टी ने राज्य महासचिव सुधीर कुमार ओझा के खिलाफ इस कार्रवाई को लेकर एक बयान भी जारी किया है। बयान में कहा गया है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के चलते प्रदेश अध्यक्ष और सांसद प्रिंस राज ने ओझा ने निष्कासन का आदेश दिया। हालांकि पार्टी के बयान में पीएम के खिलाफ दायर याचिका का जिक्र नहीं किया गया है। वहीं, पार्टी सूत्रों का कहना है कि कुछ दिनों पहले मुजफ्फरपुर में ओझा द्वारा दायर याचिका को लेकर आरएलजेपी प्रमुख पशुपति कुमार पारस को बड़ी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी थी, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई है। 

पीएम के खिलाफ दायर की याचिका

गौरतलब है कि बीते शुक्रवार को सुधीर कुमार ओझा ने एक जनहित याचिका दायर की थी। मुजफ्फरपुर निवासी विनायक कुमार की ओर से दायर इस याचिका में ओझा ने विभिन्न क्षेत्रों में निजीकरण कर कथित तौर पर संविधान का उल्लंघन करने के मामले में पीएम मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित अन्य के खिलाफ संविधान का उल्लंघन करने के लिए मामला दर्ज करने की प्रार्थना की थी। उन्होंने याचिका में कहा कि निजीकरण संविधान द्वारा गारंटीकृत समानता के अधिकार के खिलाफ है। इस याचिका पर सुनवाई के लिए मुजफ्फरपुर की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (पूर्व) की अदालत ने 6 अगस्त की तारीख दी है। 

गौरतलब है कि सुधीर कुमार ओझा पेशे से वकील भी हैं। उन्हें एक सीरियल वादी के रूप में जाना जाता है। वे अकसर राजनेताओं, फिल्म सितारों और यहां तक कि विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के खिलाफ दायर याचिकाओं के लिए चर्चा में रहते हैं।

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