Earthquake In Nepal: भूकंप के झटकों से कांपा काठमांडू, बिहार के कई जिलो में दिखा असर

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नेपाल की राजधानी काठमांडू में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। यहां 5.5 तीव्रता का भूकंप आया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने बताया, सुबह करीब 7:58 मिनट पर झटके महसूस किए गए। भूकंप इतना तेज था कि बिहार के कई जिलों में इसका असर देखने को मिला है। लोगों का कहना है कि उन्हें भी झटके महसूस हुए। 

रविवार यानी छुट्टी वाला दिन होने के कारण लोग घरों पर ही थे। ऐसे में सुबह-सुबह भूकंप के झटकों ने लोगों को दहशत में डाल दिया। झटके महसूस होते ही लोग घरों से बाहर की ओर भागे। हालांकि, गनीमत रही कि भूकंप के कारण जान-माल के नुकसान की जानकारी नहीं है। 

जानें क्यों आता है भूकंप?
धरती मुख्य तौर पर चार परतों से बनी होती हैं। इनर कोर, आउटर कोर, मैनटल और क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल कोर को लिथोस्फेयर कहते हैं। ये 50 किलोमीटर की मोटी परत कई वर्गों में बंटी हुई है जिसे टैकटोनिक प्लेट्स कहते हैं। ये टैकटोनिक प्लेट्स अपनी जगह पर कंपन करती रहती हैं और जब इस प्लेट में बहुत ज्यादा कंपन हो जाती है, तो भूकंप महसूस होता है।

जानिए भूकंप के केंद्र और तीव्रता का क्या मतलब है?
भूकंप का केंद्र वह स्थान होता है जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से धरती हिलने लगती है। इस स्थान पर या इसके आसपास के क्षेत्रों में भूकंप का असर ज्यादा होता है। अगर रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है।

विस्तार

नेपाल की राजधानी काठमांडू में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। यहां 5.5 तीव्रता का भूकंप आया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने बताया, सुबह करीब 7:58 मिनट पर झटके महसूस किए गए। भूकंप इतना तेज था कि बिहार के कई जिलों में इसका असर देखने को मिला है। लोगों का कहना है कि उन्हें भी झटके महसूस हुए। 

रविवार यानी छुट्टी वाला दिन होने के कारण लोग घरों पर ही थे। ऐसे में सुबह-सुबह भूकंप के झटकों ने लोगों को दहशत में डाल दिया। झटके महसूस होते ही लोग घरों से बाहर की ओर भागे। हालांकि, गनीमत रही कि भूकंप के कारण जान-माल के नुकसान की जानकारी नहीं है। 

जानें क्यों आता है भूकंप?

धरती मुख्य तौर पर चार परतों से बनी होती हैं। इनर कोर, आउटर कोर, मैनटल और क्रस्ट। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल कोर को लिथोस्फेयर कहते हैं। ये 50 किलोमीटर की मोटी परत कई वर्गों में बंटी हुई है जिसे टैकटोनिक प्लेट्स कहते हैं। ये टैकटोनिक प्लेट्स अपनी जगह पर कंपन करती रहती हैं और जब इस प्लेट में बहुत ज्यादा कंपन हो जाती है, तो भूकंप महसूस होता है।

जानिए भूकंप के केंद्र और तीव्रता का क्या मतलब है?

भूकंप का केंद्र वह स्थान होता है जिसके ठीक नीचे प्लेटों में हलचल से धरती हिलने लगती है। इस स्थान पर या इसके आसपास के क्षेत्रों में भूकंप का असर ज्यादा होता है। अगर रिक्टर स्केल पर 7 या इससे अधिक की तीव्रता वाला भूकंप है तो आसपास के 40 किमी के दायरे में झटका तेज होता है।

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