बिहार: जाति आधारित जनगणना के काम को पूरा करने के लिए समय-सीमा बढ़ी, सरकार ने बताई ये है वजह

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नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री, बिहार
– फोटो : एएनआई (फाइल फोटो)

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राज्य मंत्रिमंडल ने जाति आधारित जनगणना के काम को पूरा करने के लिए तय समय-सीमा को बढ़ा दिया है। मंत्रिमंडल ने मंगलवार को इस समय-सीमा को फरवरी 2023 से बढ़ाकर मई 2023 करने की मंजूरी प्रदान की है। 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में आज मंत्रिमंडल की बैठक संपन्न हुई। बैठक के बाद कैबिनेट सचिवालय के अपर मुख्य सचिव एस. सिद्धार्थ ने बताया कि मंत्रिमंडल ने जाति आधारित जनगणना का काम पूरा करने की तय समय-सीमा फरवरी 2023 को बढ़ाकर मई 2023 करने की स्वीकृति दी है। 

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची का पुनर्निरीक्षण का काम और बिहार में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड की परीक्षाएं संचालित होने से कर्मियों की अतिरिक्त जवाबदेही होगी। इसलिए जाति आधारित जनगणना के कार्य की समय सीमा बढाई गई है। 

राज्य सरकार जाति जगगणना के इस अभ्यास के लिए आकस्मिक कोष से पांच सौ करोड़ रुपये खर्च करेगी। 

राज्य सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कैबिनेट ने दिन के दौरान एक साइट और हेडकाउंट के लिए एक ऐप विकसित करने के लिए 2.44 करोड़ रुपये बजटीय आवंटन को भी मंजूरी दी। सामान्य प्रशासन विभाग सर्वेक्षण के लिए नोडल प्राधिकरण है। यह अभ्यास पहले फरवरी 2023 में पूरा होने वाला था। 

राज्य की राजनीति में जाति-आधारित गणना एक प्रमुख मुद्दा रहा है। नीतीश कुमार की जदयू और महागठबंधन के सभी घटक लंबे समय से मांग कर रहे थे कि यह अभ्यास जल्द से जल्द किया जाए। 
 
साल 2010 में जब केंद्र में यूपीए सरकार थी, तो उसने भी राष्ट्रीय स्तर पर इस अभ्यास के लिए सहमति व्यक्त की थी। हालांकि, जनगणना के दौरान इकट्ठा किए गए आंकड़ों को कभी भी संसाधित नहीं किया गया था। 

विस्तार

राज्य मंत्रिमंडल ने जाति आधारित जनगणना के काम को पूरा करने के लिए तय समय-सीमा को बढ़ा दिया है। मंत्रिमंडल ने मंगलवार को इस समय-सीमा को फरवरी 2023 से बढ़ाकर मई 2023 करने की मंजूरी प्रदान की है। 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में आज मंत्रिमंडल की बैठक संपन्न हुई। बैठक के बाद कैबिनेट सचिवालय के अपर मुख्य सचिव एस. सिद्धार्थ ने बताया कि मंत्रिमंडल ने जाति आधारित जनगणना का काम पूरा करने की तय समय-सीमा फरवरी 2023 को बढ़ाकर मई 2023 करने की स्वीकृति दी है। 

अपर मुख्य सचिव ने बताया कि निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची का पुनर्निरीक्षण का काम और बिहार में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड की परीक्षाएं संचालित होने से कर्मियों की अतिरिक्त जवाबदेही होगी। इसलिए जाति आधारित जनगणना के कार्य की समय सीमा बढाई गई है। 

राज्य सरकार जाति जगगणना के इस अभ्यास के लिए आकस्मिक कोष से पांच सौ करोड़ रुपये खर्च करेगी। 

राज्य सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कैबिनेट ने दिन के दौरान एक साइट और हेडकाउंट के लिए एक ऐप विकसित करने के लिए 2.44 करोड़ रुपये बजटीय आवंटन को भी मंजूरी दी। सामान्य प्रशासन विभाग सर्वेक्षण के लिए नोडल प्राधिकरण है। यह अभ्यास पहले फरवरी 2023 में पूरा होने वाला था। 

राज्य की राजनीति में जाति-आधारित गणना एक प्रमुख मुद्दा रहा है। नीतीश कुमार की जदयू और महागठबंधन के सभी घटक लंबे समय से मांग कर रहे थे कि यह अभ्यास जल्द से जल्द किया जाए। 

 

साल 2010 में जब केंद्र में यूपीए सरकार थी, तो उसने भी राष्ट्रीय स्तर पर इस अभ्यास के लिए सहमति व्यक्त की थी। हालांकि, जनगणना के दौरान इकट्ठा किए गए आंकड़ों को कभी भी संसाधित नहीं किया गया था। 



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