Bihar Politics: जदयू के संगठन चुनाव में बवाल, मंगेर और मधेपुरा में कई जगह पर चुनाव रद्द

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बिहार सीएम नीतीश कुमार
– फोटो : सोशल मीडिया।

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बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसका अंदाजा पार्टी के संगठनात्मक चुनाव के दौरान मचे बवाल से लगाया जा सकता है। ऐसे कई दावे मीडिया रिपोर्ट में किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि मंगेर और मधेपुरा में कई जगह पर चुनाव रद्द कराने पड़े हैं। ऐसा कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद करना पड़ा है। इन सब के बीच 80 फीसदी जगहों पर निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए हैं। आज यानी गुरुवार को 115 प्रखंडों में चुनाव कराए जाएंगे।

इससे पहले बिहार के 500 सांगठनिक प्रखंडों में बीते दिन चुनाव कराए गए थे। इनमें से 80 फीसदी अध्यक्ष निर्विरोध चुने गए। इस दौरान मुंगेर में बवाल की वजह से पांच प्रखंडों में चुनाव स्थगित करने पड़े। वहीं, हवेली खड़गपुर में जदयू के संगठन चुनाव खड़गपुर झील पर कराए जाने पर सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद बवाल बढ़ा तो कार्यकर्ताओं ने सरकारी गेस्ट हाउस में तोड़फोड़ की। इसके अलावा मधेपुरा के आलमनगर में मतदाता सूची को लेकर कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई। काफी देर के हंगामे के बाद चुनाव रद्द कराना पड़ा।

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बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसका अंदाजा पार्टी के संगठनात्मक चुनाव के दौरान मचे बवाल से लगाया जा सकता है। ऐसे कई दावे मीडिया रिपोर्ट में किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि मंगेर और मधेपुरा में कई जगह पर चुनाव रद्द कराने पड़े हैं। ऐसा कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद करना पड़ा है। इन सब के बीच 80 फीसदी जगहों पर निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए हैं। आज यानी गुरुवार को 115 प्रखंडों में चुनाव कराए जाएंगे।

इससे पहले बिहार के 500 सांगठनिक प्रखंडों में बीते दिन चुनाव कराए गए थे। इनमें से 80 फीसदी अध्यक्ष निर्विरोध चुने गए। इस दौरान मुंगेर में बवाल की वजह से पांच प्रखंडों में चुनाव स्थगित करने पड़े। वहीं, हवेली खड़गपुर में जदयू के संगठन चुनाव खड़गपुर झील पर कराए जाने पर सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद बवाल बढ़ा तो कार्यकर्ताओं ने सरकारी गेस्ट हाउस में तोड़फोड़ की। इसके अलावा मधेपुरा के आलमनगर में मतदाता सूची को लेकर कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई। काफी देर के हंगामे के बाद चुनाव रद्द कराना पड़ा।



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